मॉर्गेज डीड (Mortgage Deed)
मॉर्गेज डीड को हिंदी में बंधक विलेख (बंधकनामा) कहा जाता है। यह एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी अचल संपत्ति जैसे मकान, प्लॉट, कृषि भूमि या अन्य पात्र अचल संपत्ति को ऋण की सुरक्षा के लिए बैंक या वित्तीय संस्था के पक्ष में बंधक रखता है।
1. मॉर्गेज डीड क्या होती है?
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उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को अपने व्यवसाय के लिए बैंक से ₹20 लाख का ऋण लेना है। बैंक ऋण की सुरक्षा के लिए उसकी संपत्ति पर बंधक अधिकार चाहता है। ऐसी स्थिति में लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मॉर्गेज डीड या अन्य बंधक दस्तावेज बनाया जा सकता है।
इसमें सामान्यतः निम्न जानकारी होती है:
- ऋण लेने वाले व्यक्ति या संस्था का विवरण।
- बैंक या ऋणदाता का विवरण।
- संपत्ति का पूरा विवरण।
- ऋण की राशि और बकाया चुकाने की शर्तें।
- ब्याज, भुगतान और डिफॉल्ट की शर्तें।
- बंधक के प्रकार और ऋणदाता के अधिकार।
- दस्तावेज के निष्पादन एवं लागू होने की शर्तें।
महत्वपूर्ण: संपत्ति बंधक रखने का अर्थ हर मामले में उसका कब्जा बैंक को देना नहीं है। यह बंधक के प्रकार और दस्तावेज की शर्तों पर निर्भर करता है।
2. मॉर्गेज डीड के प्रमुख प्रकार
भारतीय कानून में Transfer of Property Act, 1882 की धारा 58 में बंधक के विभिन्न प्रकारों का प्रावधान है।
1. साधारण बंधक (Simple Mortgage)
संपत्ति का कब्जा सामान्यतः मालिक के पास रहता है। ऋण न चुकाने पर ऋणदाता कानून के अनुसार संपत्ति की बिक्री के माध्यम से बकाया वसूल करने का उपाय अपना सकता है।
2. सशर्त विक्रय द्वारा बंधक (Mortgage by Conditional Sale)
इसमें बिक्री जैसी दिखने वाली व्यवस्था के साथ निर्धारित शर्तें जुड़ी होती हैं। इसकी कानूनी वैधता के लिए दस्तावेज और वास्तविक लेनदेन का स्वरूप महत्वपूर्ण है।
3. उपभोग बंधक (Usufructuary Mortgage)
इसमें ऋणदाता को संपत्ति का कब्जा और उससे प्राप्त किराया या लाभ, निर्धारित शर्तों के अनुसार, ऋण की वसूली के लिए मिल सकता है।
4. अंग्रेजी बंधक (English Mortgage)
इसमें कानून में वर्णित शर्तों के अनुसार संपत्ति हस्तांतरित करने और ऋण चुकाने पर पुनः हस्तांतरण की व्यवस्था होती है।
5. टाइटल डीड जमा करके बंधक (Mortgage by Deposit of Title Deeds)
संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेज निर्धारित कानूनी शर्तों के अंतर्गत ऋणदाता के पास जमा किए जाते हैं। इसे सामान्यतः Equitable Mortgage भी कहा जाता है। हर मामले में अलग पंजीकृत मॉर्गेज डीड आवश्यक हो, ऐसा नहीं है; राज्य के कानून, दस्तावेज और लेनदेन की वास्तविक प्रकृति जाँचना जरूरी है।
6. असाधारण या अवशिष्ट बंधक (Anomalous Mortgage)
इसमें ऐसे बंधक शामिल हो सकते हैं जो कानून में बताए गए अन्य प्रकारों में सीधे नहीं आते या जिनमें एक से अधिक प्रकारों की विशेषताएँ होती हैं।
3. मॉर्गेज डीड और Equitable Mortgage में अंतर
यह अंतर STAMP WALA के दस्तावेज लेखन कार्य में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
| आधार | Registered Mortgage Deed | Equitable Mortgage |
|---|---|---|
| सामान्य अर्थ | लिखित बंधक विलेख के माध्यम से बंधक अधिकार बनाना | पात्र परिस्थितियों में टाइटल डीड जमा करके सुरक्षा बनाना |
| मुख्य दस्तावेज | बंधक विलेख | स्वामित्व दस्तावेज और बैंक के निर्धारित रिकॉर्ड |
| पंजीयन | लागू कानून के अनुसार सामान्यतः आवश्यक | हर मामले में अलग बंधक विलेख का पंजीयन जरूरी नहीं; राज्य कानून और दस्तावेज की प्रकृति देखें |
| बैंक की भूमिका | बंधक अधिकार के अनुसार | बंधक सुरक्षा के अनुसार |
| खर्च | स्टाम्प ड्यूटी, पंजीयन शुल्क और अन्य लागू शुल्क | लागू होने पर स्टाम्प ड्यूटी, मेमोरेंडम शुल्क या अन्य शुल्क |
Transfer of Property Act की धारा 59 सामान्य बंधक विलेख के निष्पादन और पंजीयन के नियम बताती है, जबकि टाइटल डीड जमा करके बंधक बनाने का अलग प्रावधान है।
ध्यान दें: केवल दस्तावेज पर “Equitable Mortgage” लिख देने से लेनदेन का कानूनी स्वरूप तय नहीं हो जाता। दस्तावेज की वास्तविक सामग्री, उद्देश्य और लागू राज्य कानून महत्वपूर्ण हैं।
4. मॉर्गेज डीड के लिए आवश्यक दस्तावेज
बैंक और संपत्ति के प्रकार के अनुसार सूची बदल सकती है। सामान्यतः निम्न दस्तावेज तैयार रखने चाहिए।
दस्तावेज चेकलिस्ट
अपनी तैयारी जाँचें
0/10ऋण लेने वाले का आधार कार्ड और PAN कार्डबैंक का Sanction Letter / Loan Approvalमूल रजिस्ट्री या स्वामित्व विलेखखसरा, खतौनी, B-1 एवं संबंधित राजस्व अभिलेख (जहाँ लागू हों)नामांतरण और संपत्ति संबंधी अन्य रिकॉर्डसंपत्ति का नक्शा, क्षेत्रफल, सीमाएँ और पहचान विवरणपूर्व बंधक, ऋण और Encumbrance संबंधी जाँचसह-स्वामी की सहमति या हस्ताक्षर, जहाँ आवश्यक होंबैंक द्वारा निर्धारित Mortgage Deed Draftफोटो, पहचान, गवाहों और पंजीयन के लिए आवश्यक विवरण
कृषि भूमि के मामले में यह भी जाँचें कि भूमि का स्वामित्व, हस्तांतरण या बंधक रखना लागू कृषि भूमि संबंधी प्रतिबंधों और बैंक की पात्रता शर्तों के अनुरूप है या नहीं।
5. मॉर्गेज डीड में कौन-कौन सी बातें लिखी जाती हैं?
एक सुव्यवस्थित बंधक विलेख में सामान्यतः निम्न धाराएँ होती हैं:
- शीर्षक और तारीख: Mortgage Deed का नाम, निष्पादन का स्थान और तारीख।
- पक्षकारों का विवरण: बंधककर्ता (Mortgagor) और बैंक/ऋणदाता (Mortgagee) का पूरा विवरण।
- ऋण का विवरण: स्वीकृत राशि, ब्याज दर और ऋण का उद्देश्य।
- संपत्ति का विवरण: जिला, तहसील, ग्राम/वार्ड, खसरा नंबर या प्लॉट नंबर, क्षेत्रफल और सीमाएँ।
- स्वामित्व की घोषणा: बंधककर्ता के अधिकार और संपत्ति पर मौजूद भारों का विवरण।
- बंधक बनाने की शर्त: किस प्रकार का बंधक बनाया जा रहा है और उससे कौन-से अधिकार उत्पन्न होंगे।
- पुनर्भुगतान: किस्तें, देय तारीखें, ब्याज और अन्य भुगतान।
- डिफॉल्ट की शर्तें: भुगतान न होने पर लागू कानूनी उपाय।
- बीमा, कर एवं रखरखाव: लागू जिम्मेदारियाँ।
- बंधक मुक्ति (Redemption): पूरा ऋण चुकाने के बाद बंधक समाप्त करने और दस्तावेज लौटाने की प्रक्रिया।
- निष्पादन और गवाह: हस्ताक्षर, आवश्यक गवाह और पंजीयन की औपचारिकताएँ।
इन धाराओं को बैंक के स्वीकृत प्रारूप और वास्तविक लेनदेन के अनुरूप रखना चाहिए; किसी दूसरे मामले का प्रारूप ज्यों का त्यों इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
6. मध्य प्रदेश में मॉर्गेज डीड की स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री
मध्य प्रदेश में मॉर्गेज डीड की स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क दस्तावेज के प्रकार, कब्जा दिया जा रहा है या नहीं, सुरक्षित ऋण राशि और लागू शुल्क अनुसूची पर निर्भर करते हैं।