दानपत्र (Gift Deed) क्या होता है?

Stamp Duty on Gift Deed in Maharashtra in 2026?

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दानपत्र (Gift Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी चल या अचल संपत्ति (जैसे मकान, प्लॉट, कृषि भूमि या धनराशि) को बिना किसी आर्थिक प्रतिफल के स्वेच्छा से किसी दूसरे व्यक्ति को दान करता है।

भारत में दानपत्र से संबंधित प्रमुख कानून Transfer of Property Act, 1882 की धारा 122 और 123 हैं।

1. दानपत्र किनके बीच बनाया जा सकता है?

दानपत्र सामान्यतः निम्नलिखित व्यक्तियों के बीच बनाया जा सकता है:

  • पिता से पुत्र या पुत्री के नाम।
  • माता से पुत्र या पुत्री के नाम।
  • पति से पत्नी या पत्नी से पति के नाम।
  • भाई-बहन के बीच।
  • अन्य रिश्तेदारों या किसी भी व्यक्ति के पक्ष में, लागू कानूनों के अधीन।

2. दानपत्र की प्रमुख विशेषताएँ

विषयजानकारी
उद्देश्यसंपत्ति बिना कीमत लिए हस्तांतरित करना
दानकर्ता (Donor)जो व्यक्ति संपत्ति दान करता है
दानग्राही (Donee)जिसे संपत्ति दान में मिलती है
प्रतिफलकोई बिक्री मूल्य नहीं दिया जाता
स्वीकृतिदानग्राही को दान स्वीकार करना आवश्यक है
पंजीयनअचल संपत्ति के दानपत्र का पंजीयन सामान्यतः अनिवार्य है
गवाहअचल संपत्ति के दानपत्र पर कम-से-कम दो गवाह आवश्यक हैं

3. दानपत्र बनाने की प्रक्रिया

चरण 1: संपत्ति के दस्तावेज़ जाँचें

स्वामित्व दस्तावेज़, खसरा, खतौनी, B-1, संपत्ति विवरण और लागू प्रतिबंधों की जाँच करें।

चरण 2: दानपत्र का प्रारूप तैयार करें

दानकर्ता, दानग्राही, संपत्ति का विवरण, दान का उद्देश्य और स्वीकृति स्पष्ट रूप से लिखें।

चरण 3: स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क निर्धारित करें

शुल्क राज्य के नियमों, संपत्ति के प्रकार, मूल्य और पक्षकारों के संबंध के अनुसार जाँचें।

चरण 4: उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीयन कराएँ

आवश्यक पहचान-पत्र, दस्तावेज़, पक्षकारों और गवाहों की उपस्थिति तथा लागू प्रक्रिया पूरी करें।

चरण 5: नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करें

पंजीयन के बाद संबंधित राजस्व या स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में नामांतरण के लिए आवेदन करें, जहाँ लागू हो।

4. दानपत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज़

  • दानकर्ता और दानग्राही के आधार कार्ड या अन्य मान्य पहचान-पत्र।
  • PAN कार्ड, जहाँ आवश्यक हो।
  • संपत्ति का पूर्व स्वामित्व दस्तावेज़।
  • खसरा, B-1, नक्शा या अन्य लागू संपत्ति अभिलेख।
  • पासपोर्ट आकार के फोटो, जहाँ आवश्यक हों।
  • दो गवाहों के पहचान-पत्र।
  • संपत्ति का मूल्यांकन और शुल्क संबंधी विवरण।
  • विशेष मामलों में सहमति, अनुमति या अन्य दस्तावेज़।

5. दानपत्र और विक्रय विलेख में अंतर

आधारदानपत्र (Gift Deed)विक्रय विलेख (Sale Deed)
संपत्ति हस्तांतरणबिना प्रतिफलकीमत के बदले
भुगतानबिक्री मूल्य नहींबिक्री मूल्य दिया जाता है
मुख्य उद्देश्यसंपत्ति का दानसंपत्ति की बिक्री
पंजीयनअचल संपत्ति के लिए सामान्यतः अनिवार्यअचल संपत्ति की बिक्री के लिए सामान्यतः अनिवार्य
स्वीकृतिदानग्राही की स्वीकृति आवश्यकबिक्री की सहमति और भुगतान संबंधी शर्तें लागू

6. मध्य प्रदेश में दानपत्र बनवाते समय ध्यान दें

मध्य प्रदेश में दानपत्र तैयार करने से पहले संपत्ति का प्रकार, दानकर्ता और दानग्राही का संबंध, लागू स्टाम्प शुल्क, पंजीयन शुल्क और किसी विशेष छूट की पात्रता जाँचना आवश्यक है। रिश्तेदारों के बीच दानपत्र पर हर स्थिति में एक समान शुल्क नहीं लगता। सही शुल्क के लिए वर्तमान नियमों और लागू सरकारी अधिसूचना की पुष्टि करें।

ध्यान दें: एक बार वैध रूप से स्वीकार किया गया और पंजीकृत दानपत्र सामान्यतः केवल मन बदलने से रद्द नहीं किया जा सकता। निरस्तीकरण कुछ सीमित कानूनी परिस्थितियों में ही संभव होता है।

STAMP WALA से दानपत्र संबंधी सहायता

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दस्तावेज़ लेखन एवं स्टाम्प संबंधी सेवाएँ

दानपत्र का प्रारूप, आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी, स्टाम्प शुल्क संबंधी मार्गदर्शन और पंजीयन प्रक्रिया में सहायता।

मोबाइल: 9424968103

पता: सहकारी कॉम्प्लेक्स, काली पुतली चौक, बालाघाट, मध्य प्रदेश – 481001

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वेबसाइट: https://stampwala.co.in

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